गार्गी प्रकाशन
प्रगतिशील और जनपक्षधर साहित्य के प्रकाशक व वितरक
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औरत एक अंतहीन ब्यथा, साम्प्रदायिकता, जनता के गीत
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औरत एक अन्तहीन व्यथा-जैसी कही और सुनी गयी

पूर्वी उत्तर प्रदेश के कुछ गाँवों में औरतों की चेतना विकसित करने गयीं महाराष्ट्र की दो छात्रा कर्मियों ने वहाँ जैसा देखा, जैसा सुना और जैसा महसूस किया उसी का एक सहज अनगढ़ विवरण इस संकलन में मौजूद है।
सन २००३, आकारः क्राउन/१६,
पृष्ठः ७०, मूल्यः रु. १०.००
साम्प्रदायिकता और फासीवाद-सही नजरिये की तलाश
इस संकलन के लेख साम्प्रदायिकता की समस्या के उन विभिन्न पहलुओं की ओर हमारा ध्यान आकर्षित करते हैं जिन्हें हम प्रायः अनदेखा कर देते हैं। ये लेख साम्प्रदायिकता के विरोध की पिटी-पिटायी लीक को छोड कर भारतीय समाज की कुछ कडवी सच्चाइयों को सामने लाते हैं।
सन २००३, आकारः डिमाई/८,
पृष्ठः ४८, मूल्यः रु. ५.००
जनता के गीत-क्रान्तिकारी समूहगान एवं जनगीत

राष्ट्रीय मुक्ति संघर्ष के काल से लेकर मौजूदा दौर में जनता के संघर्षों की कोख से जन्मे लोकप्रिय जनगीतों और क्रान्तिकारी समूहगानों के इस संग्रह को छात्रो-नौजवानों और समाज के विभिन्न तबकों में काम कर रहे कार्यकर्ताओं व सांस्कृतिक संगठनों की उपयोगिता की दृष्टि से तैयार किया गया है।
सन १९९९, आकारः डिमाई/८,
पृष्ठः ६४, मूल्यः रु. १५.००
प्रकाशित किताबें
