गार्गी प्रकाशन
प्रगतिशील और जनपक्षधर साहित्य के प्रकाशक व वितरक
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कल बहुत देर हो जायेगी – फिदेल कास्त्रो
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इस पुस्तिका में फिदेल कास्त्रो का पर्यावरण संकट पर प्रसिद्ध भाषण का हिन्दी अनुवाद प्रस्तुत है जिसे उन्होंने १९९२ में पृथ्वी सम्मेलन में दिया था। फिदेल के ही शब्दों में, मानव जाति के सामने आज एक अनिश्चित भविष्य मुँह बाये खड़ा है जिसके बारे में यदि हम समय रहते ठोस और प्रभावी कदम उठाने में असफल रहते हैं तो धनी व विकसित देश भी दुनिया की गरीब जनता के साथ मिलकर एक ही जमीन पर खड़ी अपने अस्तित्व के खतरे और अंधकारमय भविष्य से जूझ रही होगी। हम मानवता के प्रतिनिधि हैं और हमारा नैतिक कर्तव्य, राजनैतिक वचनबद्धता और असाधरण एवं ऐतिहासिक उत्तरदायित्व हमसे ठोस निर्णयों, ठोस कदमों और एक प्रतिबद्धता की माँग करते हैं जिन्हें अब टाला नहीं जा सकता है।
सन २००८, डिमाई / ८,
पृष्ठः ४६ मूल्यः रू २०
