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  • बुर्जुआ समाज और संस्कृति व मार्क्स की वापसी

    बुर्जुआ समाज और संस्कृति-तथ्यों का नेपथ्य

     

    राधागोविंद चट्‌टोपाध्याय का यह लेख ‘पहल से लिया गया है। इस लेख में बुर्जुआ समाज की पतनशीलता अनैतिकता और हिंसक प्रवृत्ति कों बहुत ही सटीक ढंग से दर्शाया गया है। ‘पहल’ से साभार ग्रहण करते हुए, इस विचारोत्तेजक लेख का उद्धार कर हम तक पहुँचाने के लिए हम समस्त पहल परिवार का आभार व्यक्त करते हैं।

    २००४, आकारः डिमाई/८
    पृष्ठः २८ मूल्यः ५.०० रूपये

     

    मार्क्स की वापसी – रणधीर सिंह


    यह लेख रणधीर सिंह द्वारा ‘फाउन्देशन रिस्पांसबिलिटी’ में नयी सहस्राव्दी के सिद्धांतों पर आयोजित व्याख्यान श्रृंखला के एक हिस्से के तौर पर दिये गये वक्तव्य के कुछ अंशों का सम्पादित रूप है। पूंजीवाद के इस नये दौर में आज दुनिया आर्थिक संकटों की चपेट में है। शासक वर्ग हमेशा मार्क्स के सिद्धांतों को छुपाता रहा है या तोड़ मरोड कर प्रस्तुत करता रहा है। लेकिन आज भी पूंजीवाद को समझने के लिए और दुनिया को बेहतर बनाने का रास्ता हमें मार्क्स के सिद्धांतों में ही मिल सकता है। मार्क्स की प्रासंगिकता तब तक रहेगी जब तक पूंजीवादी समाज है। परख से लिए गए इस लेख के लिए हम ‘परख’ परिवार के आभारी हैं।

    २००४, आकारः डिमाई/८
    पृष्ठः १३ मूल्यः  २.०० रूपये

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